त्रयी का अर्थ क्या है? 

Explanation : त्रयी का अर्थ तीन वेदों यथा- ऋग्वेद, सामवेद तथा यजुर्वेद से है। विश्व में शब्द प्रयोग की तीन शैलियां होती हैं, यथा पद्य (कविता), गद्य और गान। वेदो के मंत्र भी इन तीन विभागों के अंतर्गत बंटे हुए हैं। इनमें वेद के ‘पद्य’ विभाग ऋग्वेद और अथर्ववेद को रखा गया है, वहीं ‘गद्य’ विभाग में यजुर्वेद, तो गायन विभाग में सामवेद को रखा गया है। इन तीन प्रकार की शब्द प्रकाशन शैलियों के आधार पर ही शास्त्र एवं लोक में वेदों के लिए त्रयी शब्द का प्रयोग किया गया है। ध्यातव्य है कि, अथर्ववेद इसमें सम्मिलित नही किया जाता है, क्योंकि इसमें यज्ञ से भिन्न लौकिक विषयों का वर्णन है।