शेर-ए-बलिया किसे कहा जाता है? 

Explanation : शेर-ए-बलिया चितू पांडे को कहा जाता है। चित्तू पांडेय (Chittu Pandey) को प्यार से शेर-ए-बलिया यानि बलिया का शेर कहते हैं। बलिया के रट्टूचक गांव में 10 मई 1865 को जन्मे चित्तू पांडेय ने 1942 में बलिया में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 19 अगस्त 1942 को एक राष्ट्रीय सरकार की घोषणा करके वे उसके अध्यक्ष बने जो कुछ दिन चलने के बाद अंग्रेजों द्वारा दबा दी गई। 8 अगस्त 1942 को मुंबई में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो का नारा दिया गया और अगले ही दिन, 9 अगस्त, को देशभर में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।