लाला हरदयाल कौन थे? 

Explanation : क्रांतिकारी लाला हरदयाल का जन्म 14 अक्टूबर, 1884 को दिल्ली में हुआ था। छात्रवृत्ति पाकर उच्च शिक्षा के लिए 1905 में इंग्लैंड की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए। पढ़ाई के दौरान इंडियन सोशलिस्ट मैगजीन में अंग्रेजों के खिलाफ लेख लिखे। उन्होंने सिविल सेवा में नियुक्ति का मौका भी ठुकरा दिया था और भारत लौट आए। 1909 में पेरिस गए और वहां वंदेमातरम् पत्रिका का संपादन किया। इसके बाद उन्होंने लाला लाजपत राय की सलाह पर भारत छोड़ दिया और 1909 में वो पेरिस जा पहुंचे। जहां जाकर उन्होंने जिनेवा से निकलने वाली पत्रिका ‘वंदेमातरम’ का सम्पादन शुरू कर दिया।  ये मैगजीन दुनियाभर में बिखरे भारतीय क्रांतिकारियों के बीच क्रांति की अलख जगाने का काम करती थी। हरदयाल के लेखों ने उनके अंदर आजादी की आग जला दी। हालांकि पेरिस में उन्हें लगा था कि भारतीय समुदाय मदद देगा, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने दुखी होकर पेरिस छोड़ दिया और वो अल्जीरिया चले गए, वहां भी उनका मन नहीं लगा, जहां से वो क्यूबा या जापान जाना चाहते थे लेकिन फिर मार्टिनिक चले आए। इस तरह कई देशों में रहते हुए उन्होंने 13 भाषाओं का ज्ञान अजिर्त किया था। आजादी की लड़ाई के लिए 1913 में अमेरिका में गदर पार्टी की स्थापना की। उनका 4 मार्च 1938 में अमेरिका में निधन हो गया।

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