गायत्री मंत्र की रचना किसने की थी? 

Explanation : गायत्री मंत्र की रचना विश्वामित्र ने की थी। विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम। गायत्री मंत्र इस प्रकार है- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। इस मंत्र के माध्यम से स्वयं ब्रह्मदेव ने तपस्या कर सृष्टि की रचना की है। विश्वामित्र ऋषि ने इसी मंत्र के सहारे नई सृष्टि बनाई। गायत्री माता को वेदमाता, देवमाता, विश्व माता, पारसमणि और ब्राह्मणों की कामधेनु कहा गया है। प्रसिद्ध गायत्री मंज जो सूर्य से संबंधित देवी सावित्री को संबोधित हैं, ऋग्वेद में सर्वप्रथम प्राप्त होता है। मंडल मंत्रों की सं. रचयिता प्रथम – 11 मंत्र – 15 वर्गों में बंटा एवं प्रत्येक को एक ऋषि ने लिखा है। द्वितीय मंडल – 113 मंत्र – गुत्समद तृतीय मंडल – 62 मंत्र – विश्वामित्र (गायत्री मंत्र इसी में है) चतुर्थ मंडल – 58 मंत्र – वामदेव पंचम मंडल – 87 मंत्र – आन्तेय षष्ठम मंडल – 75 मंत्र – भारद्वाज सत्पम मंडल – 104 मंत्र – वशिष्ठ अष्टम मंडल – 186 मंत्र – घोषा, अपाला, पालि, भिरुचि नवम मंडल – 114 मंत्र – सोमवेद को समर्पित दशम मंडल – 114 मंत्र – पुरुष सूक्त का उल्लेख।

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